ik athroo

 

ਇਕ  ਅਥਰੂ  ਜਿਹਾ  ਅੱਜ  ਤਿਲਕ  ਗਿਆ

ਰਮਨਦੀਪ ਕਾਹਲੋਂ  

اک  اتھرو  جیہا  اج  تلک  گیا 

رمندیپ کاہلوں

   

 

ਇਕ  ਅਥਰੂ  ਜਿਹਾ  ਅੱਜ  ਤਿਲਕ  ਗਿਆ,  ਮੇਰੀ  ਠੰਡੀਆਂ  ਸੁੱਕੀਆਂ   ਗੱਲਾਂ  ਤੋਂ ,
ਕਦ  ਤਕ  ਲੁਕ  ਕੇ  ਬਹਿ ਜਾਂਦਾ  ਉਹ,  ਭਰੀ ਹੋਈ  ਉਸ  ਰੂਹ  ਅੰਦਰ ,
ਆਰਾਮ  ਨਾ  ਮਿਲਿਆ  ਕਦੇ  ਵੀ  ਜਿਸ  ਨੂੰ,  ਸ਼ਾਇਦ  ਪਿਛਲੇ  ਕਈ  ਜਨਮਾਂ  ਤੋਂ ,
ਇਹ  ਭਾਰ  ਜਿਹਾ  ਹੁਣ  ਲਾਹ  ਦੇਣਾ,  ਰੂਹ  ਸੋਚੀ  ਬੈਠੇ  ਚਿਰਾਂ   ਦੀ ,
ਕਦੇ  ਸੀਗੇ  ਵੀ  ਉਹ  ਦਿਨ  ਮਿਠੇ  ਜਿਹੇ,  ਕੇ  ਕੋਈ  ਭਰਮ  ਦਿਲ  ਦੀਆਂ  ਜੂਹਾਂ  ਤੋਂ ,
ਕੋਈ  ਵਾਪਿਸ  ਕਰ  ਦੇਵੇ  ਉਹ  ਮਿਸ਼ਰੀ,  ਮੈਂ  ਮੰਗਾਂ  ਅੱਜ   ਬਿਨਾਂ  ਮਨੌਤੀ  ਦੇ ,
ਜਾਂ  ਬਣਾ  ਦਿਓ  ਇਕ  ਬੁਰ੍ਬੁਰੀ,  ਘੁਲ  ਜਾਵਾਂ  ਬਿਨਾਂ  ਕਿਸੇ  ਦਰਦਾਂ  ਤੋਂ ,
ਫਿਰ  ਰੂਹ  ਆਜ਼ਾਦ ਸੌਂਵੇ  ਹਰ  ਦਮ,  ਸ਼ਾਂਤ  ਤੇ  ਬੇਹਦ  ਸੁਖਮਈ,
ਉਸ  ਮਠੇ ਜਿਹੇ  ਪਲੰਘ  ਤੇ,  ਨਾ  ਚਾਹ  ਫੁੱਲਾਂ  ਦੀ  ਅੰਬਰਾਂ   ਤੋਂ ……..
اک  اتھرو  جیہا  اج  تلک  گیا،  میری  ٹھنڈیاں  سکیاں   گلاں  توں ،
کد  تک  لک  کے  بہہ جاندا  اوہ،  بھری ہوئی  اس  روح  اندر ،
آرام  نہ  ملیا  کدے  وی  جس  نوں،  شاید  پچھلے  کئی  جنماں  توں ،
ایہہ  بھار  جیہا  ہن  لاہ  دینا،  روح  سوچی  بیٹھے  چراں   دی ،
کدے  سیگے  وی  اوہ  دن  مٹھے  جہے،  کے  کوئی  بھرم  دل  دیاں  جوہاں  توں ،
کوئی  واپس  کر  دیوے  اوہ  مشری،  میں  منگاں  اج   بناں  منوتی  دے ،
جاں  بنا  دیو  اک  بربری،  گھل  جاواں  بناں  کسے  درداں  توں ،
پھر  روح  آزاد سونوے  ہر  دم،  شانت  تے  بے حد  سکھمئی،
اس  مٹھے جہے  پلنگھ  تے،  نہ  چاہ  پھلاں  دی  امبراں   توں ……..

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